स्तन कैंसर पता लगाना स्क्रीनिंग और निदान (Breast Cancer Detection Screening and Diagnosis)
स्तन कैंसर (Breast Cancer) की शुरुआत तब होती है जब स्तन की स्वस्थ कोशिकाओं में बदलाव होने लगता है और वे काबू से बाहर हो जाती हैं। यह कैंसरयुक्त ट्यूमर जानलेवा होता है और शरीर के दूसरे भागों में फैलने लगता है। स्तन कैंसर रक्त शिराओं और/या लिम्फ़ शिराओं के ज़रिये शरीर के दूसरे अंगों या दूसरे भागों में फ़ैल जाता है और इस चरण को मेटास्टैसिस कहते हैं।
आक्रामक स्तन कैंसर को उसके फ़ैलाव के अनुसार IV चरणों में बाँटा गया है। इनमें से चरण IV को मेटास्टैटिक चरण कहते हैं जिसमें कैंसर दूसरे अंगों में फैलने लगता है। चरण I से चरण III का इलाज संभव है।
किसी भी महिला के लिए उच्च स्तन कैंसर का जोखिम एक जीवन भर का जोखिम है और यह 12% या 8 में से 1 से ज़्यादा महिलाओं को हो सकता है।*
* (सामग्री स्रोत: कैंसर की रोकथाम एवं नियंत्रण विभाग, रोग नियंत्रण एवं रोकथाम हेतु केंद्र, हाओलेडर एन, नून एएम, क्रापचो एम, और अन्य (संस्करण)। एसईईआर कैंसर सांख्यिकी समीक्षा, 1975-2017, राष्ट्रीय कैंसर समीक्षा संस्थान। बेथेस्डा, एमडी, https://seer.cancer.gov/csr/1975_2017/, नवंबर 2019 एसईईआर आँकड़ा प्रस्तुतिकरण पर आधारित, एसईईआर वेबसाइट पर पोस्ट किया गया, अप्रैल 2020।)
स्तन कैंसर स्क्रीनिंग का महत्व:
स्तन कैंसर की शुरुआत पर उसका निदान होने से उसके इलाज के ज़्यादा सफल होने, बीमारी से मुक्त उत्तरजीविता की बड़ी समयावधि तथा अच्छे रोगनिदान की संभावना बढ़ जाती है।
यह मैमोग्राम की सलाह देने के प्रभाव को दर्शाता है जो मरीज़ के स्तन कैसे दिखते हैं इससे परिचित होने में मदद करते हैं; इस मामले में जल्द से जल्द किसी भी बदलाव की सूचना मिलना अत्यंत उपयोगी होता है!
साहित्यिक सामग्री डेटाबेस में प्रकाशित एक अध्ययन इस खोज का समर्थन करता है कि शुरुआती चरणों में स्तन कैंसर का पता लगने से मरीज़ के जीवित रहने की संभावना बढ़ जाती है: स्तन कैंसर स्क्रीनिंग मैमोग्राम करवाने वाली महिलाओं की बीमारी से जान गँवाने की संभावना काफ़ी कम होती है। यह टेस्ट की गुणवत्ता, ज़रूरत या सलाह के अनुसार बार-बार स्क्रीनिंग करवाने और/या निदान होने की स्थिति में इलाज की योजना का पालन करने पर भी निर्भर करता है।
महत्वपूर्ण स्क्रीनिंग तरीकों में मैमोग्राफ़ी के अलावा खुद परीक्षण करना और स्वास्थ्य देखभाल कर्मी से नैदानिक स्तन परीक्षण करवाने की सलाह दी जाती है।
हालाँकि, कई ओंकोलॉजी और मेडिकल संगठनों ने अक्सर ख़ुद स्तनों का परीक्षण करने की सलाह दी है।
तो चलिए, शहर के सर्वश्रेष्ठ ओंकोलॉजिस्ट डॉक्टर तारा चंद गुप्ता से इस बारे में और जानें कि किस तरह से ख़ुद स्तनों का परीक्षण कर सकते हैं।
- डॉक्टर द्वारा नैदानिक स्तन परीक्षण किया जाता है, जिसमें स्तन में गाँठों या दूसरे बदलावों के होने को महसूस किया जाता है और यह नियमित जाँच का हिस्सा है।
- डॉक्टर एक बार में दोनों स्तनों को टटोलकर देखते हैं और वे बग़ल और कॉलरबोन के आसपास की जगहों की भी जाँच करते हैं।
- अगर किसी संदेहजनक गाँठ का पता लगता है, तो दूसरे टेस्ट की सलाह दी जाती है।
- इस प्रक्रिया में डॉक्टर स्तनों को देखकर उन पर चकत्तों, सूजन, उनकी समानता या सामान्य बनावट से परे दूसरी असामान्यताओं के लिए भी जाँच करते हैं। इस दौरान स्वास्थ्य देखभाल टीम के परीक्षणकर्ता या डॉक्टर स्तनों के निप्पल को हल्का दबाकर यह भी देख सकते हैं कि क्या कोई तरल पदार्थ बाहर आता है।
मैमोग्राम: यह स्तन का एक्स-रे/इमेजिंग है
- इमेजिंग के ज़रिये स्तनों में गाँठों की मौजूदगी महसूस किए जा सकने से 2 साल पहले उन्हें देख पाना संभव होता है।
- इसके बाद कई और टेस्ट किए जाते हैं जो यह तय करने में मदद करते हैं कि क्या गाँठ कैंसरयुक्त है।
- अगर गाँठ कैंसरयुक्त नहीं है, यानी उसमें वे शारीरिक लक्षण नहीं हैं जो कैंसरयुक्त गाँठों में होते हैं, तो अक्सर मैमोग्राम के अलावा दूसरे टेस्ट जैसे कि अल्ट्रासाउंड में यह अंतर दिखाई दे जाता है।
आइए, स्क्रीनिंग मैमोग्राम पर चर्चा करें; यह स्तनों की इमेजिंग है जो उस समय मरीज़ के स्तनों को देखने का अवसर देता है जब किसी गाँठ या दूसरी चिंताजनक स्थिति की मौजूदगी स्पष्ट नहीं है।
इस स्थिति में नैदानिक मैमोग्राम की भूमिका स्पष्ट रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ख़ास जगह या संबंधित जगहों पर ध्यान केंद्रित करता है – यानी संदेहजनक गाँठ, स्तनों में दर्द, निप्पल से रिसाव, स्तनों के आकार या आकृति में बदलाव या स्तनों की त्वचा में प्रकार के बदलाव।
डॉक्टर तारा चंद गुप्ता हमेशा यही सलाह देते हैं कि महिलाओं को स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग करवानी चाहिए। 40 साल की उम्र से स्क्रीनिंग मैमोग्राफ़ी शुरू कर देनी चाहिए। अगर किसी महिला को स्तन कैंसर होने का ज़्यादा जोखिम है, तो यह बहुत ज़रूरी है कि स्क्रीनिंग मैमोग्राफ़ी की शुरुआत और कम उम्र से की जाए।
स्तन एमआरआई (मैग्नेटिक रेज़ोनन्स इमेजिंग): यह स्तन की कई इमेज को एक इमेज में जोड़ने देता है ताकि एक विस्तृत चित्र तैयार हो सके। अक्सर इसका इस्तेमाल निदान के बाद कैंसर के फैलाव को नापने के लिए किया जाता है। डॉक्टर स्क्रीनिंग टेस्ट के तौर पर इसे मैमोग्राम से जोड़ने का निर्णय लेते हैं अगर मरीज़ को:
- स्तन कैंसर होने का ज़्यादा जोखिम है।
- स्तन या ओवेरीयन कैंसर का पारिवारिक इतिहास है।
- स्तन ठोस हैं (उनमें बहुत सारी नलिकाएँ, ग्रंथियाँ और रेशेदार टिश्यू हैं, लेकिन बहुत कम वसा है) और मैमोग्राम में पहले स्तन कैंसर होने का पता नहीं लगा है।
- स्तन कैंसर का मज़बूत पारिवारिक इतिहास है,
- स्तन में कैंसरपूर्व बदलाव हुए हैं, जैसे अटिपिकल हाइपरप्लेसिया या लोबुलर कार्सिनोमा इन सीटू।
- बीआरसीए1 या बीआरसीए2 जीन म्यूटेशन हुआ है।
- 30 साल की उम्र से पहले सीने के आसपास की जगह का रेडीएशन से इलाज किया गया था।
स्तनों का अल्ट्रासाउंड- डॉक्टर स्तनों के अल्ट्रासाउंड की सलाह ज़रूर देते हैं जब स्तन ठोस पाए गए हैं, मरीज़ को स्तन कैंसर होने का जोखिम है और एमआरआई नहीं हो सकता या मरीज़ गर्भवती है जिसका मतलब है कि उसे मैमोग्राम के एक्स-रे के संपर्क में नहीं लाया जा सकता।
स्क्रीनिंग से जुड़ी सलाह
अमेरिकन कैंसर सोसायटी ने महिलाओं में स्तन कैंसर के जोखिम की औसत आयु प्रदान की है:
- 40 से 44 साल: हर साल मैमोग्राम करवाने की शुरुआत करें
- 45 से 54 साल: हर साल मैमोग्राम करवाएँ
- 55 साल या उससे ज़्यादा: हर दूसरे साल मैमोग्राम करवाएँ या हर साल मैमोग्राम करवाना जारी रखें
स्तन कैंसर का निदान
निदान – नीडल ऐस्पिरेशन या सर्जिकल ब्रेस्ट बायोप्सी के ज़रिये कैंसर की पुष्टि करना। इससे कैंसर कोशिकाओं के लिए टिश्यू इकट्ठा करके उनकी जाँच कर सकते हैं।
ब्रेस्ट बायोप्सी
- यह अंतर कर सकते हैं कि क्या यह कैसरयुक्त है या नहीं।
- स्तन कैंसर का निदान होने के बाद वर्गीकरण के अनुसार स्तन कैंसर के प्रकार का और उसके फैलने की दर का निर्धारण किया जाता है।
- लिम्फ़ नोड की गहन जानकारी से यह मैप कर सकते हैं कि बीमारी कितनी दूर तक फैल चुकी है।
- दूसरे मॉलक्यूलर टेस्ट से यह तय कर सकते हैं कि इस स्थिति में टार्गेटेड ड्रग थेरपी या इम्यूनोथेरपी के लिए इलाज के कौन से तरीके सबसे अच्छे साबित होंगे। दूसरे टेस्ट से यह पूर्वानुमान लगाया जा सकता है कि इलाज के बाद कैंसर के वापस लौटने की कितनी संभावना है।
- ओंकोटाइप डीएक्स जेनोमिक टेस्ट: इसमें रिकरेंस स्कोर टेस्ट और डक्टल कार्सिनोमा इन सीटू डीसीआईएस स्कोर टेस्ट शामिल होता है।
डॉक्टर तारा चंद गुप्ता इन सभी टेस्ट को समझने में आपकी मदद कर सकते हैं। साथ ही, जिस प्रकार के कैंसर का पता लगा है वे उसके अनुसार आपको या आपके प्रियजन को इलाज की सर्वश्रेष्ठ योजना के बारे में सलाह दे सकते हैं और सर्वश्रेष्ठ रोगनिदान के साथ सफल इलाज का भरोसा दिला सकते हैं.
स्तन कैंसर के निदान के बाद क्या करना है, कौन सा इलाज करवाना चाहिए इस बारे में जयपुर के मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट (medical oncologist in Jaipur) डॉक्टर तारा चंद गुप्ता से ज़्यादा जानकारी पाएँ – इनके पास स्तन कैंसर, प्रॉस्टेट कैंसर, फेफड़े का कैंसर और लिम्फोमा के इलाज का गहरा अनुभव है। इनसे संपर्क करने के लिए https://www.tarachand.com/ पर जाएँ।

